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समावेशी शिक्षा की अवधारणा एवं इसके उद्देश्य | Concept and Objectives of Inclusive Education in Hindi

समावेशी शिक्षा की अवधारणा एवं इसके उद्देश्य | Concept and Objectives of Inclusive Education in Hindi
समावेशी शिक्षा की अवधारणा एवं इसके उद्देश्य | Concept and Objectives of Inclusive Education in Hindi

समावेशी शिक्षा की अवधारणा को समझाइए एवं इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।

समावेशी शिक्षा वह शिक्षा है जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों की संख्या बढ़ाना और उन बच्चों को भी शामिल करना है जो किसी भी प्रकार की असमर्थता रखते हो। इनका अर्थ ऐसी नीतियों और प्रवासों की रचना करना है जो अधिक से अधिक विद्यार्थियों की शिक्षा प्राप्ति की इच्छा को शान्त कर सके। इसका मुख्य उद्देश्य है कि सभी बालकों को शिक्षा प्राप्त हो सके चाहे वे किसी भी जाति धर्म, रंग, लिंग आदि से सम्बन्ध रखते हो। यह प्रयास करना भी इसका उद्देश्य है कि जो बालक एड्स, टी.बी. और अन्य किसी शारीरिक या मानसिक अपंगता का शिकार हो उन्हें भी शिक्षा ग्रहण करने का अवसर प्राप्त हो ।

समावेशी का शाब्दिक अर्थ यही दर्शाता है कि सभी को शामिल किया जाए। यह तभी सम्भव है जब शिक्षा का ढाँचा इस प्रकार बनाया जावे कि प्रत्येक बालक की आवश्यकता को पूर्ण किया जा सके। शिक्षा बालक के मानसिक स्तर के इसका उद्देश्य ऐसे समाज की रचना करना है जिसमें सभी को समान अधिकार एवं सीखने अनुरूप हो। के अवसर प्राप्त हो। यह निरन्तर आगे बढ़ने का एवं प्रगतिशील समाज की रचना करने का एक प्रयास है। इसकी कुछ विशेषताएँ है। यूनेस्को के अनुसार, ‘वे बच्चे जो विशिष्ट शैक्षिक आवश्यकताएँ रखते हैं उन्हें भी शिक्षा प्राप्त करने का उतना ही अधिकार है जितना कि सामान्य बच्चों को तथा इसके लिए ऐसे प्रयास किये जाने चाहिए कि वे सामान्य विद्यालयों में पढ़ सके, शिक्षा के ढाँचे को अपना सके और जीवन में अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उससे लाभ प्राप्त कर सके।

शिक्षा एवं प्रशिक्षण में विशेष आवश्यकताओं पर राष्ट्रीय शिक्षा आयोग के अनुसार संयुक्त शिक्षा से अभिप्राय प्रशिक्षण के ऐसे वातावरण को प्रोत्साहित करना है जो किसी नस्ल, जाति, लिंग, धर्म, संस्कृति एवं भाषा का भेदभाव किए बिना उत्तम व्यक्तित्व, अकादमिक एवं व्यावसायिक तौर पर शिक्षार्थियों का विकास करें।

अतः यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि समावेशी शिक्षा का अर्थ, इस विश्व के प्रत्येक बालक, युवा, वृद्ध को अपनी शक्ति, इच्छा, आशा आदि रखते होने का अधिकार मिलें। शिक्षा के ढाँचे में तय नहीं करना है कि जिसे पढ़ने का अधिकार हुए शिक्षित है और किसे नहीं है बल्कि सभी को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है अतः देश के नीति-निर्माताओं को चाहिए कि ये प्रत्येक बालक की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा पाठ्यक्रम तैयार करे जिससे अधिक से अधिक बच्चे शिक्षित हो सके।

समावेशी शिक्षा के उद्देश्य

समाज में समावेशी शिक्षा को लागू करने के पीछे निम्नांकित उद्देश्य है-

  1. शैक्षिक अवसरों की समानता।
  2. स्वयं को सुरक्षित महसूस करना।
  3. स्वयं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास करना।
  4. स्वयं की इच्छा के मुताबिक विषय का चयन कर शिक्षा ग्रहण करना ।
  5. बदलते विश्व में स्वयं को योग्य बनाना।
  6. जीवन की असंख्य कठिनाईयों का सामना करने के योग्य बनाना।
  7. शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना।
  8. शिक्षा अक्षम बालक का एक अधिकार है किसी प्रकार की सुविधा नहीं।
  9. शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना।
  10. समावेशन विद्यालयी संरचना में स्तरीय सुधार लाना।
  11. बाल केन्द्रित शिक्षा तथा विधियों का अंगीकार करना।
  12. अवकाश के समय का सही सदुपयोग करना।
  13. विकलांगतायुक्त बालक को व्यावसायिक प्रशिक्षण देना।
  14. अक्षम बालकों की आवश्यकतानुसार उपकरण प्रदान कर उपयोग हेतु समक्ष बनाना।
  15. समावेशित विद्यालय में विकलांग फ्रैन्डली वातावरण का निर्माण करना।
  16. अक्षम बालकों के लिए संसाधित साधन सम्पन्न कक्ष का निर्माण करना।
  17. समावेशित विद्यालयी गतिविधियों अक्षम बालकों की पूर्ण सहभागिता का होना ।
  18. अक्षम बालकों को यथासम्भव समग्र सुविधाएँ प्रदान की जानी चाहिए।
  19. अक्षम बालकों की आवश्यकता के अनुसार तकनीकों का ज्ञान देना।
  20. समाज में वंचित अथवा अक्षम बालकों के लिए जनसमर्थन तैयार करना।

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Anjali Yadav

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