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जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित करने के उपाय
भारत की जनसंख्या में तीव्र गति से होने वाली वृद्धि को रोकने के लिए निम्न उपाय किए जाने चाहिए-
(1) शिक्षा का प्रसार- शिक्षा के प्रसार से लोगों की भाग्यवादिता, रूढ़िवादिता तथा अन्धविश्वास को दूर करने में सहायता मिलेगी। वे अधिक सन्तान होने के दुष्परिणामों को समझने लगेंगे। अशिक्षित स्त्रियाँ ही अधिक बच्चों को जन्म देती हैं। इसलिए स्त्री शिक्षा का अधिकाधिक प्रसार करके जन्म दर को कम किया जा सकता है।
(2) आत्म-संयम तथा नैतिक शिक्षा का प्रसार- नैतिक तथा पूर्ण संयमी जीवन जनसंख्या को नियन्त्रित करने का एक प्रभावशाली उपाय है। अतः इस बात का समुचित प्रचार किया जाना चाहिए कि सुखी पारिवारिक जीवन तथा देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए संयमी जीवन बिताना परमावश्यक है।
(3) मनोरंजन के साधनों में वृद्धि- देश में विशेषकर ग्रामीण तथा पिछड़े क्षेत्रों में मनोरंजन के सस्ते साधनों में वृद्धि की जानी चाहिए, जैसे सिनेमा, सार्वजनिक दूरदर्शन, खेलकूद प्रतियोगिताएँ, नाटक, गायन, नृत्य, छोटी-छोटी शिक्षाप्रद फिल्मों का प्रदर्शन आदि। इन साधनों के विस्तार से जन्म-दर को कम करने में सहायता मिलेगी।
(4) परिवार नियोजन– ‘परिवार नियोजन’ (family planning) का अर्थ है-परिवार को अपनी इच्छानुसार सीमित करना तथा दो बच्चों के जन्म के मध्य पर्याप्त समयान्तर रखना परिवार नियोजन के लिए सन्तति नियन्त्रण (birth control) की विधियों को अपनाना पड़ता है। देश की जनता में विशेष रूप से ग्रामीण जनता में परिवार नियोजन के लाभों तथा उपायों का व्यापक प्रचार किया जाना चाहिए। भारत की वर्तमान परिस्थितियों में जन्म-दर के नियन्त्रण की सर्वाधिक कारगर योजना परिवार नियोजन ही है।
(5) विवाह सम्बन्धी कानूनों का सख्ती से पालन- यद्यपि कानून द्वारा विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित कर दी गई है। और बाल विवाह भी वर्जित है, फिर भी ये बुराइयों दूर नहीं हो पाई हैं। कानून का उल्लंघन करने पर उचित दण्ड की व्यवस्था होनी चाहिए।
(6) सामाजिक सुरक्षा- देश में अधिक से अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए ताकि बीमारी, बुढ़ापा, बेरोजगारी आदि के कठिन समय में उन्हें किसी पर आश्रित न रहना पड़े। इससे लोगों में परिवार बढ़ाने की अभिलाषा कम हो जायेगी जिससे जन्मदर घटेगी।
(7) सामाजिक वातावरण में परिवर्तन- भारत जैसे रूढ़िवादी देश में व्यापक प्रचार तथा अन्य उपायों द्वारा सामाजिक विचारधारा में परिवर्तन किया जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति विवाह नहीं करता है या किसी स्त्री के सन्तान नहीं होती है तो उन्हें हेय दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, गड़े परिवार की आलोचना की जानी चाहिए।
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति (National Population Policy)
भारत के लिए अनुकूलतम जनसंख्या (optimum population) क्या होनी चाहिए इस सम्बन्ध में तो निश्चित रूप से कहना कठिन है परन्तु इसमें सन्देह नहीं है कि भारत की जनसंख्या की वर्तमान वृद्धि दर को कम करना आवश्यक है। इसके लिए जनसंख्या सम्बन्धी एक उचित नीति को अपनाना आवश्यक है। एच०डी० एल्डरिज के अनुसार, “जनसंख्या नीति से अभिप्राय उन कानूनी, प्रशासनिक कार्यक्रमों तथा अन्य सरकारी प्रयत्नों से है जिनका उद्देश्य जनसंख्या की प्रवृत्ति तथा संरचना में राष्ट्रीय कल्याण के दृष्टिकोण से परिवर्तन करना है।” भारत सरकार ने स्वतन्त्रता के पश्चात् से ही एक निश्चित जनसंख्या नीति को अपनाया है जिसका उद्देश्य जन्म-दर की वृद्धि को कम करना तथा जनसंख्या के जीवन स्तर में सुधार करना है।
यद्यपि पहली पंचवर्षीय योजना से ही सरकार ने जनसंख्या नियन्त्रण के महत्व को स्वीकार किया है, परन्तु वास्तव में जनसंख्या वृद्धि को कम करने के लिए विशेष प्रयत्न पाँचवीं योजना से ही प्रारम्भ किए जा सके हैं।
1976 की राष्ट्रीय जनसंख्या नीति
भारत सरकार ने एक व्यापक राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की घोषणा 16 अप्रैल, 1976 को की थी। इस नीति का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को सीमित रखना था। इस नीति की मुख्य विशेषता निम्नलिखित थीं-
(1) सन् 1976 की राष्ट्रीय जनसंख्या नीति का लक्ष्य (a) जन्म दर को 1985 तक 35 प्रति हजार से कम करके 25 प्रति हजार करना था तथा (b) जनसंख्या की वृद्धि दर को कम करके 1.4 प्रतिशत करना था।
(2) केन्द्रीय सरकार अनिवार्य नसबन्दी (compulsory sterilisation) के पक्ष में नहीं थी परन्तु राज्य सरकारों को इस बात की स्वतन्त्रता दी गई थी कि यदि वे चाहें तो कानून बनाकर अनिवार्य नसबन्दी की योजना को लागू कर सकती हैं। राज्यों को यह सलाह दी गई कि नसबन्दी की अनिवार्यता तीसरे बच्चे के बाद लगाई जाये।
(3) विवाह की न्यूनतम आयु लड़कियों के लिए 15 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष तथा लड़कों के लिए 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष कर दी गई।
(4) विकास कार्यों के लिए राज्यों को केन्द्र द्वारा जो वित्तीय सहायता दी जायेगी उसका 8% उन राज्यों को परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर व्यय करना होगा।
(5) गरीब परिवारों को परिवार नियोजन की ओर आकर्षित करने के लिए नसबन्दी कराने वालों को दी जाने वाली मौद्रिक सहायता बढ़ा दी गई।
(6) जनसंख्या सम्बन्धी जानकारी बढ़ाने के लिए पाठ्य पुस्तकों में जनसंख्या सम्बन्धी लेख होंगे जिससे बच्चे आरम्भ से ही जनसंख्या को कम करने के महत्व को समझ सके परिवार नियोजन कार्यक्रम का व्यापक प्रचार किया जायेगा।
(7) स्त्री शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के प्रयत्न किये जायेंगे।
1977 की संशोधित जनसंख्या नीति
सरकार ने परिवार नियोजन की नीति का नाम बदलकर ‘परिवार कल्याण’ (Family Welfare) कर दिया था राष्ट्रपति ने सरकार की नीति के सम्बन्ध में 28 मार्च, 1977 को लोकसभा में कहा था कि परिवार नियोजन को लागू तो किया जायेगा, किन्तु यह ऐच्छिक तौर पर होगा। सन् 1977 की जनसंख्या सम्बन्धी नीति की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित थीं-
(1) परिवार नियोजन पर निसन्देह जोर दिया जायेगा, किन्तु यह परिवार पर निर्भर करेगा कि वह इस विषय में कौन-सा तरीका अपनाए।
(2) बच्चों के स्वास्थ्य और माँ के स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए प्रबन्ध किए गए।
(3) लड़कों और लड़कियों की विवाह आयु सीमा बढ़ा दी गई।
(4) महिलाओं की शिक्षा के अनेक कार्यक्रमों को उच्च प्राथमिकता दी गई।
(5) परिवार कल्याण के कार्यक्रमों की लोकप्रिय बनाने के लिए जन सम्पर्क के सारे साधनों का उपयोग केन्द्रीय तथा राज्य सरकारों के सहयोग से किया जाएगा।
(6) परिवार कल्याण के कार्यक्रमों में निजी व्यावसायिक संस्थाओं को धन लगाने पर आयकर में छूट मिलेगी।
(7) केन्द्रीय सरकार की ओर से राज्य सरकार को दी जाने वाली धनराशि परिवार कल्याण की सफलता पर आधारित होगी।
(8) नई नीति के अनुसार युवाओं को सामान्य शिक्षा के साथ-साथ जनसंख्या सम्बन्धी शिक्षा भी तत्काल दी जानी चाहिए।
2000 की नई राष्ट्रीय नीति
भारत सरकार ने 15 फरवरी, 2000 को नई राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की घोषणा की। इस नीति के अनुसार, सरकार जनता द्वारा स्वेच्छा तथा बिना किसी जोर जबरदस्ती के प्रजनन तथा स्वास्थ्य रक्षा सेवाओं के प्रयोग के लिए तथा लक्ष्य मुक्त परिवार नियोजन सेवाओं को लागू करने के लिए वचनबद्ध है।”
उद्देश्य (Objectives) नई राष्ट्रीय नीति के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
(i) तत्कालीन उद्देश्य (Immediate Objectives) नई नीति का तत्कालीन उद्देश्य गर्भ निरोधक साधनों की मांग को पूरा करना, स्वास्थ्य रक्षा अधोसंरचना तथा स्वास्थ्य कर्मियों की व्यवस्था करना है। इस नीति का लक्ष्य आधारभूत प्रजनन तथा बाल स्वास्थ्य रक्षा के लिए समन्वित जनन सेवा प्रदान करना है।
(ii) मध्यकालीन उद्देश्य (Medium Term Objectives)-नई नीति का मध्यकालीन उद्देश्य अन्तर क्षेत्रीय कार्यविधि का मजबूती से पालन करके सन् 2010 तक कुल प्रजनन दर (total fertility rate) को जनसंख्या को स्थिर रखने की दर (replacement rate) के बराबर करना है।
(iii) दीर्घकालीन उद्देश्य (Long Term Objectives)- इस नीति का दीर्घकालीन उद्देश्य सन् 2045 तक देश की कायम रहने योग्य विकास दर, सामाजिक विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के अनुरूप स्थिर जनसंख्या के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
लक्ष्य (Targets)-नई जनसंख्या नीति के मुख्य लक्ष्य निम्नलिखित हैं-
(1) सन् 2045 तक जनसंख्या की वृद्धि दर को शून्य करना।
(2) सन् 2010 तक शिशु मृत्यु दर को 30 प्रति हजार करना।
(3) सन् 2010 तक जन्म दर को 21 प्रति हजार करना।
(4) सन् 2010 तक कुल प्रजनन दर को 2.1 करना।
(5) सन् 2010 तक जनसंख्या को 110.7 करोड़ करना।
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