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प्रारूपण लेखन की रूपरेखा | प्रारूप तैयार करने के लिए ध्यातव्य बिन्दु

प्रारूपण लेखन की रूपरेखा | प्रारूप तैयार करने के लिए ध्यातव्य बिन्दु
प्रारूपण लेखन की रूपरेखा | प्रारूप तैयार करने के लिए ध्यातव्य बिन्दु

प्रारूपण लेखन की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए। 

प्रारूपण लेखन की रूपरेखा

प्रारूपण लेखन के प्रमुख भाग हैं- विषय निर्देश अथवा शीर्षक, विषय-वस्तु निरूपण, अनुच्छेद तथा समापन।

विषय – सरकारी कार्यालयों में तैयार किये जाने प्रारूपों के विषय भी आवश्यकतानुसार भिन्न-भिन्न होते हैं। फलतः मामलों की स्थिति, लिये गये निर्णय तथा विषय-वस्तु के अनुसार प्रारूप मसौदे का आकार-प्रकार भी अलग-अलग रूप का होगा। प्रारूपण के विषयानुसार आंतरिक बातें एवं भाषा शैली होती है । गम्भीर विषयों से सम्बन्धित प्रारूपों के लेखन में विशेष सावधानी बरती जाती है।

 
 

निर्देश- प्रारूपण तैयार करते समय यदि उसका सम्बन्ध पहले किसी पत्र या मामले से है तो उस प्रकार निर्देश (Reference) में दिया जाना उचित होता है। प्रारूप के सर्वोपरि मध्य अथवा बाएँ कोने पर पत्र संख्या दी जाती है और तत्पश्चात् उसके नीचे मंत्रालय, विभाग अथवा कार्यालय आदि का नाम, स्थान, पता एवं दिनांक दिया जाता है। इसके बाद प्रारूप की दायीं ओर अगली पंक्ति में पत्र प्रेषक का स्थान और दिनांक के पश्चात् इसके ठीक नीचे प्रेषिती का नाम, पद और पूरा पता आदि दिया जाता है। यदि आवश्यक हो तो उसके बाद संदर्भ आदि भी यथास्थिति दे दिया जाता है।

विषय वस्तु निरूपण – यह प्रारूपण लेखन का सबसे मूल एवं महत्वपूर्ण भाग होता है। प्रारूप के विषय के अन्तर्गत लिखे संक्षिप्त कथन की पूरी विवरणात्मक जानकारी यहाँ दी जाती है। इसके पश्चात् सम्बन्धित विषय की पूरी तथ्यात्मक विवेचनात्मक व मुख्य जानकारी का सर्वांगीण लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाता है। मसौदे में किये गये कथ्य एवै टिप्पणी की पुष्टि हेतु न्यायसंगत तर्क-वितकै भी दिये जाते हैं और अन्त में तर्कों के आधार पर विषय से सम्बन्धित अन्तिम निष्कर्ष प्रस्तुत करके अपना अभिमत भी प्रकट कर दिया जाता है। इस प्रकार प्रारूपण लेखन में विषय-वस्तु का पूरा सांगोपांग विश्लेषण प्रस्तुत किया जाता है।

अनुच्छेद – सामान्यतः प्रारूप लेखन में भी विषय की आवश्यकता के अनुसार अनुच्छेद किये जाते हैं। छोटे या संक्षिप्त प्रारूपों में एक या दो ही अनुच्छेद होते हैं, किन्तु प्रेस विज्ञप्ति निविदा सूचना, राष्ट्रपति की ओर से जारी किये जाने वाले पत्र तथा परिपत्र आदि के बाबत कभी-कभी दो तीन अथवा चार पृष्ठों के भी प्रारूप तैयार किये जाते हैं। ऐसे प्रारूपों में विचारों की संगति के अनुसार अनेक अनुच्छेद किये जाते हैं। प्रारूप तैयार करते समय ऐसे लम्बे प्रारूपों को अनेक अनुच्छेदों में विभाजित किया जाना चाहिए तथा ऐसे अनुच्छेदों को क्रमांक भी दिये जाने चाहिए जिससे विषय-वस्तु के आंकलन में सुविधा होती है।

समापन– प्रारूप लेखन में समापन का भी अपना एक महत्व होता है। प्रारूप में मुख्य विषय-वस्तु के निरूपण के बाद निष्कर्ष के रूप में अन्तिम बात को संक्षेप में कहा जाता है और तत्पश्चात् स्वनिर्देश के नीचे प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किये जाते हैं। हस्ताक्षर के ठीक ऊपर ‘भवदीय’ लिखा जाता है। यहाँ एक बात ध्यान रहे कि हस्ताक्षरकर्ता चाहे पुरुष हो या चाहे स्त्री- ‘भवदीय’ ही लिखा जाना चाहिए, स्त्री हस्ताक्षरकर्ता होने पर ‘भवदीया’ का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि ‘Your Faithfully’ के लिए ‘भवदीया’ रूप गलत है।

प्रारूप तैयार करने के लिए ध्यातव्य बिन्दु

प्रारूप तैयार करते समय निम्नलिखित बिन्दुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए-

(i) प्रारूप पत्रक पर दोनों ओर पर्याप्त हाशिया छोड़कर हाथ से लिखा या टाइप किया जाना चाहिए।

(ii) तैयार किये गये प्रारूप के साथ ‘अनुमोदनार्थ प्रारूप (Draft for Approval) जैसे शब्दों की चिट अवश्य लगा देनी चाहिए।

(iii) प्रारूप में स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए कि मूल पत्र के साथ क्या-क्या संलग्न किया जा रहा है। अंत में बायीं ओर संलग्न पत्रों की संख्या दे दी जानी चाहिए।

(iv) फाइल (पत्रावली) में रखकर अनुमोदनार्थ प्रस्तुत किये जाने वाले प्रारूपों पर फाइल संख्या अवश्य अंकित की जानी चाहिए।

(v) प्रारूप की भाषा सरल, सुबोध, स्पष्ट, संयत, शिष्ट और संक्षिप्त होनी चाहिए।

(vi) अर्द्धशासकीय पत्र को छोड़कर कोई भी शासकीय पत्र अधिकारी के व्यक्तिगत नाम से कदापि नहीं भेजा जाना चाहिए। शासकीय पत्र सदैव पदनाम तथा कार्यालय के नाम से ही भेजे जाने चाहिए।

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Anjali Yadav

इस वेब साईट में हम College Subjective Notes सामग्री को रोचक रूप में प्रकट करने की कोशिश कर रहे हैं | हमारा लक्ष्य उन छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की सभी किताबें उपलब्ध कराना है जो पैसे ना होने की वजह से इन पुस्तकों को खरीद नहीं पाते हैं और इस वजह से वे परीक्षा में असफल हो जाते हैं और अपने सपनों को पूरे नही कर पाते है, हम चाहते है कि वे सभी छात्र हमारे माध्यम से अपने सपनों को पूरा कर सकें। धन्यवाद..

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