शिक्षा मनोविज्ञान / EDUCATIONAL PSYCHOLOGY

विस्मृति को कम करने के क्या उपाय हैं ? शिक्षा में विस्मृति का क्या महत्व है?

विस्मृति को कम करने के क्या उपाय हैं ? शिक्षा में विस्मृति का क्या महत्व है?
विस्मृति को कम करने के क्या उपाय हैं ? शिक्षा में विस्मृति का क्या महत्व है?

विस्मृति को कम करने के क्या उपाय हैं ? शिक्षा में विस्मृति का क्या महत्व है ?

विस्मृति कम करने के उपाय (Ways of Minimising Forgetfulness)

किसी बात की कम विस्मृति का अर्थ है- उसे अधिक समय तक स्मरण रखने अथवा स्मृति में धारण रखने (Retention) की क्षमता न होना। अतः विस्मृति को कम करने या धारण-शक्ति में उन्नति करने के लिए निम्नांकित उपायों को प्रयोग में लाया जा सकता है-

1. पूरे पाठ का स्मरण (Memorising the Whole Lesson) – बालक को पूरा पाठ सोच-समझकर याद करना चाहिए। जब तक उसे पूरा पाठ याद न हो जाए, तब तक उसे स्मरण करने का कार्य स्थगित नहीं करना चाहिए। साथ ही, उसे पाठ को आंशिक रूप से स्मरण नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से पाठ का भूल जाना आवश्यक है।

2. पाठ की विषय-वस्तु (Content Matter) – कोलेसनिक (Kolesnik) के अनुसार-पाठ की विषय-वस्तु अर्थपूर्ण, क्रमबद्ध और बालक की मानसिक योग्यता के अनुरूप होनी चाहिए, क्योंकि इस प्रकार की विषय-वस्तु की विस्मृति की गति और मात्रा बहुत कम होती है। इसके अतिरिक्त, पाठ में आवश्यकता से अधिक तथ्य, तिथियाँ और विस्तृत सूचनाएँ नहीं होनी चाहिएँ, क्योंकि इनकी विस्मृति की गति और मात्रा बहुत तीव्र होती है।

3. विचार-साहचर्य के नियमों का पालन (Use of Association Laws)- पाठ याद करते समय बालक को विचार-साहचर्य के नियमों का पालन करना चाहिए। उसे नवीन तथ्यों और घटनाओं का उन तथ्यों और घटनाओं से सम्बन्ध स्थापित करना चाहिए, जिनको वह जानता है। ऐसा करने से वह सम्भवतः पाठ का कभी विस्मरण नहीं करेगा।

4. सस्वर वाचन (Loud Reading) – बालक को पाठ बोल-बोलकर स्मरण करना चाहिए। वुडवर्ध (Woodworth) के शब्दों में इसका कारण यह है- “सक्रिय सस्वर वाचन के पश्चात् विस्मरण की गति धीमी होती है।”

5. पाठ का अधिक स्मरण (More Learning of the Lesson)- पाठ स्मरण हो जाने के बाद भी बालक को उसे कुछ समय तक और स्मरण करना चाहिए। इसका कारण बताते हुए नन (Nunn) ने लिखा है- “पाठ स्मरण हो जाने के बाद जितना अधिक स्मरण किया जाता है, उतना ही अधिक वह स्मृति में धारण रहता है।”

6. अधिक समय तक स्मरण रखने का विचार (Decision for Long Retention)- बालक को पाठ यह विचार करके स्मरण करना चाहिए कि उसे उसको बहुत समय तक याद रखना है। तभी वह उसे शीघ्र भूलने की सम्भावना का अन्त कर सकता है।” बोरिंग, लैंगफील्ड एवं वील्ड (Boring, Langfeld & Weld) ने लिखा है- “अधिक समय तक स्मरण रखने के विचार से याद किया हुआ पाठ अधिक समय तक स्मरण रहता है।”

7. स्मरण के बाद विश्राम (Rest after Memorizing) – बालक को पाठ स्मरण करने के उपरान्त कुछ समय तक विश्राम अवश्य करना चाहिए ताकि पाठ के स्मृति चिन्ह उसके मस्तिष्क में स्पष्ट रूप से अंकित हो जाएँ। वुडवर्थ (Woodworth) के शब्दों में, “सीखने के बाद कुछ समय तक विश्राम का महत्व अनेक परीक्षणों द्वारा किया गया है।”

8. पूर्ण व अन्तरयुक्त विधियों का प्रयोग (Use of Spaced and Non-spaced Methods)- बालक को पाठ याद करने के लिए पूर्ण (Whole) और अन्तरयुक्त (Spaced) विधियों का प्रयोग करना चाहिए। इसका कारण यह है कि खण्ड (Part) और अन्तरहीन (Unspaced) विधियों की अपेक्षा इन विधियों से याद किए गए पाठ का विस्मरण कम होता है।

9. बालक का स्मरण करने में ध्यान (Attention in Memorising)- पाठ को स्मरण करते समय बालक को अपना पूर्ण ध्यान उस पर केन्द्रित रखना चाहिए। वुडवर्थ (Woodworth) के शब्दों में इसका कारण यह है—”सीखने वाला जितना अधिक ध्यान देता है, उतनी ही जल्दी वह सीखता है और बाद में उतनी ही अधिक देर में वह भूलता है।”

10. पाठ की पुनरावृत्ति (Repetition) – पाठ को स्मरण करने के बाद बालक को उसे थोड़े-थोड़े समय के उपरान्त ” दोहराते रहना चाहिए। पाठ की जितनी ही अधिक पुनरावृत्ति की जाती है, उतनी ही अधिक देर से वह भूलता है। वुडवर्थ ने लिखा है— “पुनः अधिगम स्मृति-चिन्हों को सजीव बनाता है और विस्मरण को कम करता है।”

“Relearning improves the memory traces and reduces forgetting.” – Woodworth

11. स्मरण करने के नियमों का प्रयोग (Use of Laws of Memory)- बालक को विस्मरण कम करने के लिए स्मरण करने की मितव्ययी विधियों का प्रयोग करना चाहिए। इसकी पुष्टि करते हुए वुडवर्थ ने लिखा है- “स्मरण के लिए मितव्ययता के नियम धारण-शक्ति के लिए भी लागू होते हैं। “

“The rules for economy of memorizing hold good also for retention.” – Woodworth

शिक्षा में विस्मृति का महत्व (Importance of Forgetting in Education)

कॉलिन्सड्रेवर ने लिखा है- “यह सत्य है कि विस्मरण, स्मरण के विपरीत है, पर व्यावहारिक दृष्टिकोण से विस्मरण लगभग उतना ही लाभप्रद है, जितना कि स्मरण।”

“It is true that forgetting is the opposite of remembering, but from a practical point of view forgetting is almost as useful as remembering.” – Collins & Drever : Psychology & Practical Life

विस्मरण लाभप्रद क्यों है ? बालक की शिक्षा में उसका कार्य, महत्व और आवश्यकेता क्या है ? हम इनसे सम्बन्धित तथ्यों पर निम्नांकित पंक्तियों में प्रकाश डाल रहे हैं-

1. अस्त-व्यस्तता से बचाव- यदि बालक के मस्तिष्क में सभी बातों के स्मृति चिन्ह अंकित होते चले जाएँ, तो उसके विचार पूर्ण रूप से अस्त-व्यस्त हो जाएँगे। अतः अपने विचारों को व्यवस्थित रूप प्रदान करने के लिए उसे कुछ बातों का भुलाना अनिवार्य है। स्टर्ट एवं ओकडन (Sturt & Oakden) के अनुसार- “यदि हम अपने विचारों में व्यवस्था और बल चाहते हैं, तो हमारे लिए विस्मरण आवश्यक है। “

2. भाषा शिक्षण में उपयोगी- बालक शुद्ध लेखन और शुद्ध उच्चारण के अतिरिक्त विभिन्न विषयों में कुछ सीमा तक सफलता प्राप्त करने का इच्छुक रहता है। वह गलत कार्यों और गलत विधियों का विस्मरण करके ही ऐसा कर सकता है। मन (Munn) के अनुसार-“उचित प्रतिक्रिया का अर्जन करने के लिए हमें अनुचित प्रतिक्रियाओं को बहुधा भूल जाना आवश्यक है।”

3. पुरानी बातों को भूलकर नई बातों को सीखना- ऐसी अनेक बातें होती हैं, जिनको बालक पुरानी बातों को भूलकर ही सीख सकता है; जैसे-पढ़ने या लिखने की उपयुक्त विधियाँ। अतः उसे उन विधियों को भुला देना आवश्यक है, जिनका प्रयोग वह करता चला आ रहा है। वुडवर्थ (Woodworth) के अनुसार- “नई बातों का सीखना पुरानी बातों के स्मरण में बाधा डालता है और पुरानी बातों का स्मरण नई बातों को सीखने में बाधा डालता है।”

4. क्षणिक महत्व की बातों को भुलाना- बालक, विद्यालय में ऐसी अनेक बातें सीखता है, जो उसके लिए क्षणिक महत्व की होती हैं। अतः उसके लिए उन्हें स्थायी रूप से स्मरण न रखकर भुला देना ही अच्छा है। कोलेसनिक (Kolesnik) के अनुसार—“जीवन के अनेक अनुभवों का केवल क्षणिक महत्व होता है और वे स्मरण रखने के योग्य नहीं होते हैं।”

5. दुःखद अनुभवों को भूलना- बालक को अपने विद्यालय और पारिवारिक जीवन में समय-समय पर कटु या दुःखद अनुभव होते हैं। ये अनुभव, स्मरण की प्रक्रिया में बाधा उपस्थित करते हैं। अतः इनका विस्मरण करके ही बालक विद्यार्जन के लक्ष्य की प्राप्ति कर सकता है। भाटिया (Bhatia) के अनुसार-“भली प्रकार स्मरण करने के लिए हमें बहुत कुछ भुला देना आवश्यक है।”

6. समान रूप से अनुपयोगी बातों का भुलाना- बालक प्रतिदिन अनेक बातें सीखता है। वे सब उसके लिए समान रूप से उपयोगी नहीं होती हैं। अतः जैसा कि क़ो एवं क्रो (Crow & Crow) के अनुसार- “सीखने वाले के लिए यह जानना आवश्यक है कि वह क्या स्मरण रखे आर क्या भुला दे ?”

7. सीमित क्षेत्र का उपयोग- बालक का स्मृति क्षेत्र सीमित होता है। अतः यदि वह सब बातों को स्मरण रखे, तो उसे अपने स्मृति-क्षेत्र में नवीन बातों को स्थान देना असम्भव हो जाएगा। इस दृष्टि से उसे पुरानी बातों का विस्मरण करना आवश्यक है। कोलिन्स एवं ड्रेवर (Collins & Drever) का कथन है— “विस्मरण किसी भी प्रकार के लाभप्रद अधिगम का आवश्यक अंग है।”

उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर हम कह सकते हैं कि बालक की शिक्षा में विस्मरण का स्थान अति महत्वपूर्ण है। वह विस्मरण करके ही शिक्षा सम्बन्धी नई बातों को सीख सकता है। रिबट ने ठीक लिखा है- “स्मरण करने की एक शर्त यह है कि हमें विस्मरण करना चाहिए।”

“One condition of remembering is that we should forget.” – M. Ribot. Quoted by James

शिक्षक को चाहिए कि वह छात्रों में नवीन चीजों को सीखने पर बल दे। उन्हें संतुलित रूप से सिखाए। संवेगात्मक संतुलन बनाए रखे। मानसिक द्वन्द्व तथा संघर्ष को दूर करे। ऐसा करने से विस्मृति स्वाभाविक होगी, जो बालक का मानसिक स्वास्थ्य बनाने में योग देगी।

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About the author

Anjali Yadav

इस वेब साईट में हम College Subjective Notes सामग्री को रोचक रूप में प्रकट करने की कोशिश कर रहे हैं | हमारा लक्ष्य उन छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की सभी किताबें उपलब्ध कराना है जो पैसे ना होने की वजह से इन पुस्तकों को खरीद नहीं पाते हैं और इस वजह से वे परीक्षा में असफल हो जाते हैं और अपने सपनों को पूरे नही कर पाते है, हम चाहते है कि वे सभी छात्र हमारे माध्यम से अपने सपनों को पूरा कर सकें। धन्यवाद..

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