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विश्वसनीयता का अर्थ एवं परिभाषा | meaning and definition of credibility in Hindi

विश्वसनीयता का अर्थ एवं परिभाषा लिखिए। 

विश्वसनीयता का अर्थ एवं परिभाषा (meaning and definition of Reliability)- विश्वसनीयता का शाब्दिक अर्थ विश्वास करने की सीमा से है। अतः विश्वसनीय परीक्षण वह परीक्षण है, जिस पर विश्वास किया जा सके। यदि किसी परीक्षण का प्रयोग बार-बार उन्हीं छात्रों पर किया जाये तथा वे छात्र बार-बार समान अंक प्राप्त करें, तो परीक्षण को विश्वसनीय कहा जाता है। स्पष्ट है कि परीक्षण की विश्वसनीयता का सम्बन्ध उससे मिलने वाले प्राप्तांकों में स्थायित्व (Consistency) से है। यदि परीक्षण से प्राप्त अंकों में स्थायित्व है तो परीक्षण को विश्वसनीय परीक्षण के रूप में स्वीकार किया जाता है। उदाहरण के लिए यदि किसी बुद्धि परीक्षण से रमेश की बुद्धिलब्धि 112 प्राप्त होती है तथा 10 दिन के पश्चात पुनः उस परीक्षण का प्रयोग करके रमेश की बुद्धिलब्धि ज्ञात की जाती है। यदि इस बार रमेश की बुद्धिलब्धि 112 के लगभग आती है, तो परीक्षण को विश्वसनीय परीक्षण कहा जायेगा, परन्तु यदि दूसरी बार रमेश की बुद्धिलब्धि 112 से काफी कम या अधिक आती है तो परीक्षण को अविश्सवनीय परीक्षण कहा जायेगा। इस प्रकार से विश्वसनीयता किसी परीक्षण पर किसी समूह के सदस्यों के द्वारा प्राप्त अंकों की संगतता (Consistency) की घोतक होती है। किसी परीक्षण की विश्वसनीयता बताती है कि प्राप्तांक किस सीमा तक चर त्रुटियों से मुक्त हैं। परीक्षण पर प्राप्त अंकों को सैद्धांतिक दृष्टि से वास्तविक प्राप्तांक तथा चर त्रुटि का योग माना जा सकता है। दूसरे शब्दों में किसी भी प्राप्तांक (X) को दो भागों में विभक्त माना जा सकता है, प्रथम भाग छात्र की वास्तविक योग्यता को व्यक्त करता है जिसे वास्तविक या सत्य प्राप्तांक (T) कहा जा सकता है, जबकि द्वितीय भाग मापन में हुई त्रुटि का घोतक होता है जिसे त्रुटि अंक (E) कहा जा सकता है। अतः

X=T+E

विचलन के रूप में लिखा जा सकता है कि

x=t+e

क्योंकि त्रुटि (e) शून्य के दोनों ओर रैन्डम रूप से वितरित मानी जा सकती है, इसलिए प्रसरण (Variance) रूप में उपरोक्त समीकरण को लिखा जा सकता है-

σx2=  σt2e

कुल प्रसरण (Total Variance) = सत्य प्रसारण (True Variance) +  त्रुटि प्रसरण (Error Variance)

नि:सन्देह इस समीकरण में कुल प्रसरण (Total Variance) को σx2 से सत्य प्रसरण (True Variance) को σt2 से एवं त्रुटि प्रसरण (Error Variance) को σe से इंगित किया गया है। इस समीकरण के दोनों पक्षों को कुल प्रसरण σx2से भाग देने पर,

1= σt2x+ σex

उपरोक्त समीकरण के दांये पक्ष (Right side) का प्रथम पद परीक्षण की विश्वासनीयता को इंगित करता है। अतः कहा जा सकता है कि वास्तविक प्राप्तांकों के प्रसरण σt2 का कुल प्राप्तांकों के प्रसरण σx से अनुपात ही विश्वसनीयता है। दूसरे शब्दों में सत्य प्रसरण के अनुपात को ही विश्वसनीयता गुणांक कहा जाता है। अतः

विश्वसनीयता गुणांक = सत्य प्रसारण ( σt2)

कुल प्रसारण (σx2)

विश्वसनीय गुणांक = त्रुटि प्रसारण (σe)

कुल प्रसारण (σx2)

विश्वसनीयता को प्रसरणों के अनुपात के रूप में व्यक्त करते समय दो बातों को स्मरण रखना आवश्यक है। प्रथम, कुल प्राप्तांक (x) को सत्य प्राप्तांक (T) व त्रुटि प्राप्तांक (E) के रूप में विभाजित करना, केवल सैद्धांतिक रूप से सम्भव है। व्यवहार में इस प्रकार का विभाजन करना असम्भव है। किसी छात्र के कुल प्राप्तांक (x) के सापेक्ष न तो सत्य प्राप्तांक (T) का मान ज्ञात किया जा सकता है और न ही त्रुटि अंश (E) का मान ज्ञात किया जा सकता है। इस प्रकार का विभाजन केवल विश्वसनीयता के सैद्धांतिक विवेचन के लिए परिकल्पित किया गया है। द्वितीय, परिकल्पित की गयी त्रुटि (E) शून्य के दोनों ओर रैन्डम ढंग से विचरित होती है। कहने का अर्थ है अंश E का मान कम भी हो सकता है तथा अधिक भी हो सकता है अथवा धनात्मक भी हो सकता है तथा ऋणात्मक भी हो सकता है।

अनास्तेसी के अनुसार “परीक्षण की विश्वसनीयता से अभिप्राय भिन्न-भिन्न अवसरों पर, या समतुल्य पदों के भिन्न-भिन्न विन्यासों पर, किसी व्यक्ति के द्वारा प्राप्त अंकों की संगति से है। “

स्टोडोला व स्टोर्डल के शब्दों में “विश्वसनीयता को किसी समूह के व्यक्तियों के लिए समतुल्य परीक्षणों पर प्राप्तांकों के दो या दो से अधिक विन्यासों के मध्य सहसम्बन्ध के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।’

गिलफोर्ड के अनुसार “विश्वसनीयता परीक्षण प्राप्तांकों में सत्य प्रसरण का अनुपात है।’ विश्वसनीयता को स्थिरता गुणांक (Coefficients of Stability), समतुल्यता गुणांक (Coefficient of Equivalence) तथा सजातीयता गुणांक (Coefficient of Homogenity) के रूप में भी परिभाषित किया जाता है भौतिक मापन की तुलना में शैक्षिक मापन सामान्यतः कम विश्वसनीय होते हैं।

भौतिक मापन के विश्वसनीय होने के तीन प्रमुख कारण निम्नवत हैं-

  1. भौतिक विशेषताओं का मापन प्रत्यक्ष विधि (Direct Method) से किया जाता है।
  2. भौतिक विशेषतायें साधारणत: स्थाई प्रकृति की होती हैं ।
  3. भौतिक विशेषताओं के मापन में प्रयुक्त उपकरण अधिक यथार्थ होते हैं। इसके ठीक विपरीत शैक्षिक व मनोवैज्ञानिक मापन अपेक्षाकृत कम विश्वसनीय होते हैं।

शैक्षिक मापन के कम विश्वसनीय होने के प्रमुख कारण निम्नवत् हैं-

  1. शैक्षिक विशेषतायें साधारणत: अप्रत्यक्ष विधि (Indirect Method) से मापी जाती है
  2. शैक्षिक विशेषताओं में प्रायः समय अन्तराल के साथ परिवर्तन हो जाते हैं।
  3. शैक्षिक मापन में प्रयुक्त उपकरण पूर्णतया यथार्थ नहीं होते हैं।
  4. किन्हीं विशिष्ट प्रश्नों को परीक्षण में सम्मिलित करने अथवा सम्मिलित न करने के कारण भी छात्रों के प्राप्तांकों में अन्तर आ सकता है।
  5. छात्रों को दिये गये निर्देश, समयावधि या परीक्षण दशायें जैसे कारक भी छात्रों के प्राप्तांकों को प्रभावित कर सकते हैं।
  6. उत्तर पुस्तिकाओं के अंकन में परीक्षक द्वारा हुई त्रुटियां भी छात्रों के प्राप्तांकों को प्रभावित कर सकती हैं।
  7. छात्रों के स्वास्थ्य, अभिप्रेरणा, थकान अथवा अनुमान लगाने की प्रवृत्ति जैसे कारक भी प्राप्तांकों को प्रभावित कर सकते हैं।

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About the author

Anjali Yadav

इस वेब साईट में हम College Subjective Notes सामग्री को रोचक रूप में प्रकट करने की कोशिश कर रहे हैं | हमारा लक्ष्य उन छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की सभी किताबें उपलब्ध कराना है जो पैसे ना होने की वजह से इन पुस्तकों को खरीद नहीं पाते हैं और इस वजह से वे परीक्षा में असफल हो जाते हैं और अपने सपनों को पूरे नही कर पाते है, हम चाहते है कि वे सभी छात्र हमारे माध्यम से अपने सपनों को पूरा कर सकें। धन्यवाद..

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