शिक्षाशास्त्र / Education

नवोदय विद्यालयों की स्थापना के क्या उद्देश्य हैं?

नवोदय विद्यालयों की स्थापना के क्या उद्देश्य हैं?
नवोदय विद्यालयों की स्थापना के क्या उद्देश्य हैं?

नवोदय विद्यालयों की स्थापना के क्या उद्देश्य हैं? उल्लेख कीजिए।

नवोदय विद्यालय- नवोदय विद्यालय की योजना शिक्षा के क्षेत्र के लिए एक शसक्त क्रान्ति है। यह योजना गति निर्धारक संस्था के रूप में राष्ट्रवादी स्कूल शिक्षा के उन्नयन में अग्रदूत का कार्य करेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 में इसके सम्बन्ध में लिखा हैं- “यह सर्वमान्य बात हैं कि जिन बच्चों में विशेष प्रतिभा या अभिरूचि हो, उन्हें अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराकर अधिक तेजी से आगे बढ़ने के अवसर दिये जाने चाहिए। उनकी आर्थिक स्थिति जैसी भी हो, उनको ऐसे अवसर मिलने चाहिए। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए देश के विभिन्न भागों में एक निर्धारित ढ़ाँचे पर गति निर्धारक विद्यालयों की स्थापना की जाएगी।” कार्य योजना में ऐसे विद्यालयों को नवोदय विद्यालय कहा गया हैं। देश के प्रत्येक जनपद के ग्रामीण क्षेत्र में एक नवोदय विद्यालय स्थापित करने का लक्ष्य भारत सरकार ने रखा है। यह विद्यालय केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद, दिल्ली से सम्बद्ध होंगे। इन विद्यालयों का प्रमुख उद्देश्य समान्ता एवं सामाजिक न्यायमुक्त श्रेष्ठता के लक्ष्यों की पूर्ति करना होगा तथा अन्य विद्यालयों के लिए ये गति निर्धारक का कार्य करेगी। सन् 1985 86 में झज्जूर, जिला रोहतक (हरियाणा) व अमरावती (महाराष्ट्र) में एक-एक नवोदय विद्यालय खोले गये।

इसके बाद देश के विभिन्न भागों में 423 नवोदय विद्यालय खोले जा चुके है। नवोदय विद्यालय का स्वरूप एवं संगठन

1. देश की निर्धनता और निर्बलता प्रतिभाओं को सम्पन्न शैक्षिक सुविधाएं प्राप्त करा कर उनकी शक्तियाँ का राष्ट्रहित में योगदान प्राप्त करने के लिए नवोदय विद्यालय स्थापित किया गये हैं।

2. नई शिक्षा नीति के अनुसार, सातवी योजना (1989-90) के अन्त तक देश भर में प्रत्येक जिले में ग्रामीण क्षेत्र में एक नवोदय विद्यालय की स्थापना का सुझाव था।

3. नवोदय विद्यालयो में उच्चतर माध्यमिक स्तर, कक्षा 6 से 12 तक की शिक्षा प्रदान की जाती हैं।

4. नवोदय विद्यालयो का स्तर पब्लिक स्कूलों के स्तर के समान होता है। इसलिए उन्हे आदर्श विद्यालय या दर्शक या गति निर्धारक विद्यालय कहा गया है।

5. नवोदया विद्यालय का संचालन ‘नवोदय विद्यालय समिति द्वारा होता हैं जो मानव संसाधन मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्तशासी संस्था हैं।

6. ये विद्यालय केन्द्रीय शिक्षा परिषद् (C.B.S.E.) से सम्बद्ध हैं।

7. नवोदय विद्यालय में छात्रों का प्रवेश एक प्रवेश परीक्षा माध्यम से होता है। प्रवेश परीक्षा का आयोजन N.C.E.R.T. के नवोदय प्रकोष्ठ द्वारा होता है। यह चयन अखिल भारतीय स्तर पर होता हैं। 75 प्रतिशत छात्र ग्रामीण अंचलो से चयन किये जाते हैं अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए क्रमशः 15 व साढ़े सात प्रतिशत स्थान आरक्षित होते है।

8. नवोदय विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों निर्धन, प्रतिभावान छात्रों को उच्च कोटि की शिक्षा देने के लिए स्थापित किये गये है। इसलिए ये पूर्ण रूप से निशुल्क शिक्षा प्रदान करते है।

बच्चों को भोजन आवास, ड्रेस, पुस्तको आदि पर कुछ भी खर्च नही करना होता।

1. शैक्षिक अवसरों की समानता- नवोदय विद्यालय की स्थापना का उद्देश्य निर्धन, प्रतिभावान ग्रामीण क्षेत्र के बालक-बालिकाओं को शिक्षा की श्रेष्ठता सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ये सारी सुविधाएं निशुल्क देकर उनको सम्पन्न वर्ग के बच्चों के समय आगे बढ़ने के अवसर दिये जाते है।

2. माध्यमिक विद्यालयों को आदर्श प्रस्तुत करना- नवोदय विद्यालय शिक्षा अनुशासन, नवाचार और शिक्षणोत्तर क्रियाओं में श्रेष्ठतम उपलब्धि वाले तथा अन्य विद्यालयो के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने। ये विद्यालय गति निर्धारक का कार्य करेगें।

3. शिक्षा में नवाचार को प्रोत्साहन- नवोदय विद्यालय का उद्देश्य शिक्षा में- गतिशीलता उत्पन्न करना हैं। नवीन शिक्षण विधियों शिक्षण तकनीक और पाठ्क्रम में नवीन विषयों को शामिल करके ये शिक्षा में नवाचार को प्रोत्साहन देते हैं।

4. राष्ट्रीय एकता और सद्भावना का विकास- जाति, धर्म, लिंग और आर्थिक स्थिति पर ध्यान दिये बिना, केवल प्रतिभा के आधार पर बच्चों को प्रवेश देने के कारण ये राष्ट्रीय एकता और सदभावना के विकास के सहायक होते है।

5. प्राचीन संस्कृति और वैज्ञानिकर्ता का समन्वय- नवोदय विद्यालयों का उद्देश्य भारतीय संस्कृति के आदर्शों के प्रति लगाव उत्पन्न करने के साथ-साथ विद्यार्थियों के दृष्टिकोण को वैज्ञानिक और आधुनिक बनाना है।।

6. राष्ट्र की प्रतिभाओं को खोजकर उनको विकास का अवसर प्रदान करना।

7. देश के विद्यालय सुधार कार्यक्रमों में इनक विद्यालयों द्वारा उत्प्रेरक का कार्य करना।

8. इनमें बालको को निःशुल्क शिक्षा एवं आवास की व्यवस्था करना।

9. छात्र संख्या सीमित होने के कारण शिक्षा में गुणात्मक सुधार करना।

10. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित होने के कारण ये विद्यालय छात्रों को पर्यावरण शिक्षा का सम्यक ज्ञान करा सकेंगे।

11. विभिन्न भाषाई क्षेत्रों के छात्रों के परस्पर स्थानान्तरण से छात्रों में परस्पर सह अस्तित्व एवं सहयोग की भावना का विकास करना।

प्रवेश प्रक्रिया- नवोदय विद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया राष्ट्रीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा के आधार पर होता हैं। कक्षा 5 उत्तीर्ण उसी क्षेत्र के छात्र इस प्रवेश परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं। छात्रों की आयु एक मई को 9 वर्ष से कम और 13 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। यह शर्त अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्र छात्राओं पर लागू नहीं होगी। प्रवेश परीक्षा का माध्यम मातृभाषा अथवा क्षेत्रीय भाषा. हैं प्रवेश परीक्षा लिखित होती हैं, जो वस्तुनिष्ठ प्रश्नो पर आधारित हैं। प्रवेश परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर कोई भी छात्र/छात्रा दूसरी बार प्रवेश परीक्षा में नहीं बैठ सकता है।

शिक्षण का माध्यम- नवोदय विद्यालयों में शिक्षण का माध्यम निम्नलिखित हैं।

1. कक्षा 7 से 8 तक शिक्षण का माध्यम मातृभाषा अथवा क्षेत्रीय भाषा ।

2. कक्षा 9 से 12 तक गणित और विज्ञानों के लिए शिक्षण का माध्यम अंग्रेजी।

3. सामाजिक विज्ञानों के शिक्षण का माध्यम हिन्दी हैं। इन विद्यालयों में त्रिभाषा सूत्र का प्रयोग किया जाता हैं। अहिन्दी भाषी क्षेत्रों के छात्र को तीन भाषाएं क्षेत्रीय भाषा, हिन्दी भाषा और अंग्रेजी भाषा पढ़नी पड़ती हैं।

4. हिन्दी भाषी क्षेत्रों के विद्यालयों में 30 प्रतिशत छात्र जिस भाषा के स्थानान्तरित जोकर आते है।, वह भाषा तीसरी भाषा के रूप में पढ़ायी जाती हैं।

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Anjali Yadav

इस वेब साईट में हम College Subjective Notes सामग्री को रोचक रूप में प्रकट करने की कोशिश कर रहे हैं | हमारा लक्ष्य उन छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की सभी किताबें उपलब्ध कराना है जो पैसे ना होने की वजह से इन पुस्तकों को खरीद नहीं पाते हैं और इस वजह से वे परीक्षा में असफल हो जाते हैं और अपने सपनों को पूरे नही कर पाते है, हम चाहते है कि वे सभी छात्र हमारे माध्यम से अपने सपनों को पूरा कर सकें। धन्यवाद..

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